अरे अरे देखो पंडाल से पानी बहने लगा है कहाँ से आ रहा है
ये पानी देखो तो ज़रा | ओफो बस
थोड़ी सी देर में यहाँ कीचड़ हो जायेगा और जब सारे देशभक्त यहाँ आ जायेंगे तो फिर
क्या होगा ?अरे
वो टेंट वाला बंदा कहाँ गया ? पंडाल में हडकंप मची हुई थी और हो भी क्यूँ ना
भाई अगुस्त के महीने में इतनी बारिश और अन्ना जी का आन्दोलन स्थल पूरे तरीके से
कीचड से सराबोर हो चुका था और किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था | तभी किसी ने
आवाज़ दी अरे “हिमांशु” कहाँ है वही कुछ कर सकता है इतने ऊंचे पंडाल में भरे पानी
का क्या करना है बुलाओ उसे ? और बस पूरा
पंडाल हिमांशु, हिमांशु, चिल्लाने लगा तभी अचानक कही दूर ऊपर से आवाज़ आती है सर,
परेशान मत हों बस थोड़ी देर में ऊपर जमा पानी निकल जाएगा | सभी चौंक कर देखते हैं
कि आवाज़ कहाँ से आ रही है ? है तो ये किसी अपने की ही आवाज़ ? तभी फिर से वही आवाज़
गूंजती है अरे अरे वहाँ से हट जाइए पानी आएगा ज़रा बांस दीजिए मैं इसे और ऊपर करता
हूँ| सभी पलट कर देखते हैं तो पलट कर देखते ही सभी के चेहरे में एक लंबी सी मुस्कान बरबस आ जाती है
कि ज़मीन से करीब तीस फीट ऊपर शामियाने के एक डंडे कों पकड़ कर, एक हाथ से वो डंडे
में संतुलन बनाये और दूसरे हाथ में एक बांस कों पकड़ कर शामियाने कों ऊपर धकेलता
लटका हुआ था “हिमांशु” | और सारे बस उसकी मदद करने के लिए सब कुछ भूल कर दौड पड़ते
हैं और चंद मिनिटों में वो सारा पाने जो शामियाने में जमा हो रहा था वो निकल जाता है
और सारे कार्यकर्ता चैन की सांस लेते हैं और इस से पहले कि लोग उसके जज्बे की
तारीफ करें “हिमांशु” फिर हर बार की तरह कहीं भीड़ में फिर गुम हो जाता है|
बस कुछ ऐसा ही था हिमांशु | मध्यम कद , सुगठित शरीर , बुलंद हौसलों और
ऊर्जा से भरपूर २३-२४ साल का एक नौजवान जिसे अन्ना जी के आंदोलन ने राष्ट्र की डोर
से ऐसा जोड़ा कि हर गली हर सड़क में जब उसके जुनूनी साथियों की प्रभात फेरी निकलती
तो हिमांशु की आवाज़ सभी को रुक कर सुनने में मजबूर कर देती लोग रुकते , सुनते और
हाथों कों आकाश में लहराते जोर से बोलते भारत माता की जय | हिमांशु फिर जोश से भर
जाता और पूरी ताकत से फिर जुट जाता देशभक्तों के खून में उसी गर्मी का संचार करने
में जिसके लिए हिमांशु जाना जाता था| कोई भूख नहीं की उसकी फोटो कल के अखबार में आये या उसका
नाम आये बस चुप चाप उस काम में जुटा रहता जिसे कुछ लोग “पागलपन” और वो “देशसेवा”
कहता था |
पर क्या जादू था उस नौजवान में जो भी उस से मिलता बस उसी का
होकर रह जाता | उस से मिलने के बाद आपके चेहरे में बिखर जाने वाली मुस्कान उसके
जादू को बड़ी सहजता से साबित कर देती | बड़ा ही जिंदादिल, हमेशा हँसता मुस्कुराता
रह्ता था वो| बस उसकी आँखे उसके दिल की गहराई का कभी कभी अंदाज़ करा देतीं पर बड़ी
ही चालाकी से अपनी बातों के मायाजाल में उन्हें घुमा कर फिर निकल जाता हिमांशु और
आप फिर मुस्कुरा के रह जाते | गिनीज बुक का एक रिकॉर्ड बड़ी ही कम उम्र में हासिल
कर अपनी अध्मय इच्छा शक्ति का परिचय तो वो तब ही दे चुका था जब बच्चों के दूध के
दांत भी नहीं टूटते और फिर उसके हौसलों कों उसने दोहराया जब “वुशु” के खेल में
उसने भारत का प्रतिनिधित्व किया |
पर कभी किसी बात का दंभ नहीं किसी प्रकार का शक्ति प्रदर्शन
नहीं बस शांत और सौम्य ही बनकर रहा हमेशा हिमांशु | अन्ना जी के जबलपुर
संस्कारधानी के पूरे आंदोलन की जान था वो | कोई दिक्कत हो कोई परेशानी हो बस याद
कीजिये उसे और आपकी दिक्कत गायब इस बात की गारंटी होती थी जनाब |पिछले कुछ दिनों से वो आई ऐ सी
जबलपुर की गतिविधियों में दिखाई कम दे रहा था जब मैंने एक दिन ओसे रास्ते में देखा
तो पुछा कि कहाँ है आज कल हिमांशु दिखाई ही नहीं
देता ? तो बोला भैया बस थोड़ी दुकान की जिम्मेदारी है और भाई का हाथ बंटाने
में जुटा हूँ | मैं भी उसे अपने कर्तव्य पता पर डटा देख खुश हो गया और ये कह कर
विदा ली कि, तू लगा रह हिमांशु हम फिर मिलते हैं बस तैयार रह हमारे आंदोलन का अगला
चरण बस शरू होने वाला है | वो भी बड़े आदर्
से पैर पड़कर चला गया और मैं भी उसे अपनी आँखों से ओझल होता देख तनिक भी अंदाज़ नहीं
लगा पाया कि भविष्य किन अनिश्चितताओं के साथ हमारा परिचय करने जा रहा है |
व्यस्ततम
दिनचर्या और अपने कार्यालीय कार्यकलापों में व्यस्त होकर जीवन आगे बढ़ने लगा| उस
दिन बहुत खुश था मैं जब अपने कॉलेज के बच्चों की एक फ्रेशर पार्टी में अपने
छात्रों कों बड़े ही उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लेते देखा | जिस तत्परता और उत्साह
के साथ बच्चों ने भाग लिया मैं मन ही मन ये सोच कर खुश होता रहा कि लगता है कि अब इन
बच्चों का भविष्य सुरक्षित है और ये बहुत सफल हों जीवन में ये आशीर्वाद मन ही मन
देकर मैं घर के रास्ते में निकल पड़ा तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी और मैंने देखा की
ये फोन तो मेरे आई ऐ सी के साथी अभिलाष जी का है| मैंने बड़ी तत्परता से फोन उठाया
और अपने चिरपरिचित अंदाज़ में अभिलाष जी बोले; राहुल जी जयहिन्द| अभिलाष जी जय हिंद, बोल कर मैं बात कों आगे बढाता किन्तु अभिलाष जी
की आवाज़ में परेशानी स्पष्ट झलक रही थी उन्होंने कहा राहुल जी आपकी बात अपने किसी
साथी से हुई क्या? मैंने कहा कई फोन आये तो ज़रूर थे किन्तु कार्यक्रम के दौरान मैं
उन्हें नहीं उठा पाया कुछ खास है क्या अभिलाष भैया ? भय और परेशानी में डूबी हुई
अभिलाष जी कि आवाज़ आई आपको हिमांशु के बारे में कुछ पता है क्या ? मैंने कहा नहीं
क्यूँ? उसने आत्महत्या का प्रयास किया है और उसकी हालत बहुत चिंता जनक है | जैसे
मुझे कोई सांप सूंघ गया हो अभिलाष जी की आती हुई आवाज़ सुनाई देना जैसे बंद हो गयी |
पीछे सी आती कार का होर्न जैसे मेरे कान के परदे कों फाड़ने में आमादा था किन्तु
मेरे ज़ेहन में तो जैसे कुछ जा ही नहीं रहा था | बस अनेको सवाल उमड़ने रहे थे |
क्या, क्यूँ , कैसे , हिमांशु वही है या फिर कोई और है मैं समझ नहीं पा रहा था और
बहुत सी अनिश्चितताओं के बीच तेजी से भागता हुआ मैं सीधे अस्पताल पहुंचा और बदहवास
सा दौडता हुआ जब मैं हिमांशु तक आई.सी.सी.यू. में पहुंचा तो जैसे सारी आशंकाओं कों
सही होता देकर और घबरा गया कि हे ईश्वर ये क्या दिखा रहा है ? ये मेरे हिमांशु कों
क्या सूझ गया ? “कैसे” से ज्यादा आवश्यक लगा अब “क्या” होगा और उस सवाल के जवाब को
पाने चिकित्सक की ओर पहुँचा और उसका टका सा जवाब पाकर और घबरा के रह गया | ऐसा
क्या हुआ कि हिमांशु कों ये कदम उठाना पड़ा? वो योद्धा जिसपे हमेशा नाज़ था वो क्यूँ
हार गया ?सारे कार्यकर्ता इकट्ठा होने लगे थे | सभी की दुआएं जुड़ने लगी और इसी लिए
शायद एक दो दिन और जी लिया पर ईश्वर को जैसे बड़ी जल्दी थी कि जैसे वो कोई आंदोलन
स्वर्ग में करना चाहते हों और उसके लिए हिमांशु से बेहतर व्यक्ति उन्हें नहीं मिला
| नियति के क्रूर हाथों ने हमारे दिल की धडकन कों जैसे हम से छीन लिया| सारी आँखों
में जैसे आंसुओं का सैलाब सा उमड़ पड़ा | और ऐसा हो भी क्यूँ ना हजारों लोगों का
दुलारा अब नहीं रहा| सारे युवाओं का प्रतिनिधि , धैर्य और आत्विश्वास की पहचान अब
साथ नहीं थी अगर कुछ साथ था तो बहुत से उन सुलझे सवाल , आंसुओं से नम आँखे, दर्द
से फटता सिर और मुँह को आया कलेजा और इन्ही आंसुओं के बीच जैसे मन में एक ज्वाला
जल रही थी कि अब कुछ ऐसा किया जाए कि कोई “हिमांशु” हम से यूँ दूर ना हो |बहुत
सारे विचार एक नयी सोच को जन्म देने लगे थे | एक नयी सोच का जैसे प्रस्फुटन हो उठा
था | कालिमा ने सूरज को पूरी तरह ढँक लिया
था और इन्ही सारे विचारों के साथ दर्द से फटते सिर में कब आँख लग गयी पता ही नहीं
चला |

अगली सुबह
थोड़ी भयानक सी लग रही थी |होती भी क्यूँ ना एक घने अंधकार के साथ घड़ी का काँटा आठ
बजाने को आतुर था लीकें चरों ओर घना अन्धेरा छाया हुआ था कि जैसे “हमारे सूरज” को
निगलने के बाद ब्रह्माण्ड में जैसे कोई
दूसरा अतिरिक्त सूरज जैसे बचा ही न हो परन्तु हर दुःख पर जैसे कुछ सिखाता है वैसे
ही कुछ शिक्षा हमें भी दे गया कि एक शिक्षक होने के नाते हमारा दायित्व क्या है ?
हम क्या करें की की हमारी आने वाली पीढ़ी कभी भी ऐसे क्रूर कदम ना उठाये ? एक
अभिभावक के रूप में हमारे दायित्व क्या हैं? हम क्या करें कि फिर किसी “हिमांशु”
को हमें ना खोना पड़े? बहुत सारे सवालों के जवाब में एक नया हौसला था , एक नया
इरादा एक नयी सोच नया ध्येय बस “हिमांशु” तुम्हारे कारण| काश कि तुम ये समझ पाते कि
तुम्हारी माँ ने क्या क्या सपने बुने थे ? पिता जी जी कि खामोशी तुम्हारे लिए
प्रार्थनाओं का सबब होती थी | भाई का प्यार दिल से सच्चा था और तू तो बेटा नायक था
सारे युवाओं का जो तुझे देख कर तेरे जैसा बनने के सपने पालने लगते थे | ये देश एक
लंबी नींद के बाद तेरे गीत सुन कर अंगडाई लेने लगा था और उसके जागने के पहले ही “हिमांशु”
तुम सो गए | कागज कि स्याही पर आँखों का पानी टपकने लगा है और ये मेरी रचना जो हिमांशु के लिए
मेरी श्रद्धांजलि है वो तनिक भी खराब न हो अतः यहीं इस लेख कि इतिश्री करना चाहता
हूँ बस एक बार दिल से अपने “हिमांशु” कों कहना चाहता हूँ हम सभी तुमसे बहुत प्यार
करते हैं| “हिमांशु” अब जहाँ भी हो बस खुश रहना| अलविदा दोस्त , अलविदा बेटा ,
अलविदा भाई , अलविदा हिमांशु.... अलविदा अलविदा अलविदा ...............