Friday, December 9, 2011

फिर जबलपुर क़ी सड़कों में गूंजेंगे "भारत माता की जय" के नारे

संस्कारधानी जबलपुर में फिर वही राष्ट्र प्रेम की गूँज दिखाई देगी जिस गूँज ने अगस्त माह में सारे देशभक्तों को एक जुट कर दिया था | इंडिया अगेंस्ट करप्शन जबलपुर के द्वारा श्री अन्ना हजारे जी के आह्वान पर एक दिवसीय "सामूहिक अनशन" का आयोजन ११ दिसम्बर २०११ को सिविक सेण्टर स्थित जे. डी. ए. पार्क में किया गया है | भ्रष्ट होती राजनीति और राष्ट्र में हुए राष्ट्र भक्ति के अवमूल्यन से चिंतित सजग प्रहरियों ने सरकार से एक सशक्त जनलोकपाल बिल की मांग १६ अगस्त के ऐतिहासिक अनशन में की थी | संस्कारधानी जबलपुर की जनता ने भी राष्ट्र हित में बढ़ चढ़कर योगदान दिया और राष्ट्रीय पटल में जबलपुर को एक सशक्त स्थान  दिलाया था | संस्कारधानी जबलपुर , जिसे हर दिन बढ़ते अपराधों के लिए जाना जाने लगा था उसी संस्कारधानी के सजग नागरिकों ने इस आन्दोलन को भारी सफलता दिलाने में महतवपूर्ण योगदान दिया था |
                    राजनीति के जानकारों ने जबलपुर के इस ऐतिहासिक आन्दोलन की तुलना शरद यादव के आन्दोलन से भी की है | संस्कारधानी जबलपुर के युवा , वृद्ध , महिलाएँ सभी अन्ना जी के इस आन्दोलन से ओत प्रोत नज़र आये और हाथों में तिरंगे लेकर भारत माता की जयघोष करते सड़कों पर निकल आये थे | महिलाओं ने अपने घर के रोज़मर्रा के कार्यक्रमों से ज्यादा वरीयता इस आन्दोलन को दी और पूरा सिविक सेण्टर का अनशन स्थल एक राष्ट्रीय स्मारक में तब्दील हो गया था | लोग अपने प्रति दिन के कार्यक्रमों में सिविक सेण्टर के अनशन स्थल तक पहुँचने को भी जोड़ने लगे थे | कभी सारे स्वयं सेवकों के लिए कोई सुबह की चाय लेकर पहुंचता था तो कभी लोगों में उन राष्ट्रभक्तों को भोजन कराने की होड़ लगी रहती  | कभी बूढी माँ अपने अनशनकारी बेटे को देखने दिन भर गर्व से बैठी रहती तो कभी एक आधुनिका अपने नवजात बेटे को लेकर राष्ट्र भक्ति के संस्कार रोपित करने के लिए सिविक सेण्टर के अनशन स्थल में पूरा दिन गुज़ार देती थी | सभी नागरिकों की जन भावनाओं के आगे अंततः सरकार को झुकना पड़ा और एक सशक्त जन लोकपाल बिल को पेश करने का वादा कर इस ऐतिहासिक आन्दोलन को सरकार ने समाप्त करवाया |

किन्तु सरकार की जनलोकपाल के प्रति उदासीनता के कारण श्री अन्ना हजारे जी ने सभी नागरिकों से अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का आह्वान किया और इसी कड़ी में ११ दिसम्बर २०११ रविवार को एक विशाल सामूहिक अनशन का आयोजन इंडिया अगेंस्ट करप्शन जबलपुर के द्वारा सिविक सेण्टर पार्क में आयोजित है | संस्कारधानी जबलपुर के समस्त विद्यार्थियों , नौकरी पेशा , व्यवसायी, वृद्ध  और समस्त महिलाओं से भ्रष्टाचार के विरोध में एवं सशक्त जनलोकपाल बिल के समर्थन में ११ दिसम्बर २०११ को एक दिन का सांकेतिक  अनशन कर सभी ईमानदार राष्ट्र भक्तों को सिविक सेन्टर स्थित जे. डी ए .पार्क में रविवार को सुबह ११ बजे से उपस्थित होने की अपील की है |   

Sunday, July 17, 2011

तेरे सीने में नहीं तो मेरे सीने में सही, तेरे सीने में नहीं तो मेरे सीने में सही,

हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए

  "भ्रष्टाचार क़ी भेंट चढ़े १५५५ हज़ार करोड़"

भ्रष्टाचार के काले पन्नों में एक और अध्याय जुड़ गया जब पुणे स्थित एक अत्यंत ही ज़िम्मेदार और महत्वपूर्ण संस्था "इण्डिया फोरेंसिक" ने ये खुलासा किया क़ी बीते दशक में १५५५ हज़ार करोड़ रूपए भ्रष्टाचार क़ी भेंट चढ़ गए हैं और भी ज्यादा परेशान करने वाला तथ्य ये क़ी इसमें से ज़्यादातर कमाई विदेश भेजी जा चुकी है | अपने आप में एक अनूठी रिपोर्ट "अस्सेस्तेर्निग साइज़ ऑफ़ करप्शन इन इण्डिया विथ रेस्पेक्ट तो मनी लौन्डरिंग" में बताया क़ी साल २००९ में प्रति व्यक्ति औसतन २००० रूपए क़ी घूस दी गई जो क़ी पिछले दस सालों में किसी नागरिक द्वारा इस मद में दी गई रकम का २६० गुना अधिक है | रिपोर्ट के मुताबिक बीते दशक में मनी लौन्डरिंग के तहत करीब १८८६ हज़ार करोड़ रूपए भारत से भेजे गए |

                      ऐसे कितने ही अध्याय भ्रष्टाचार के इस ग्रन्थ में अनवरत ही जुड़ते चले जायेंगे जब तक हम सभी स्वयं से इसका प्रतिकार नहीं करते| अपने कार्यों क़ी सुगमता को ध्यान में ना रख कर राष्ट्र हेतु कुछ प्रक्रियाओं कपालन में विश्वास नहीं रखते फिर वो चाहे बिना आरक्षण के रेल में यात्रा करना हो या फिर लाइसेंस बनाने के लिए बिना प्रक्रियाओं में बंधे लाइसेंस पाने का लालच | हम सभी अगर अंतिम शदों में कार्यों के निष्पादन से बचें तो अपने आप हम इन प्रक्रियाओं से हम बच सकते हैं | षडिक सहजता एवं सरलता कई बार हमें अनजाने में ही इस भ्रष्ट तंत्र का एक हिस्सा बना देती है. कहीं ना कहीं हम उसी तंत्र को मज़बूत करते जाते हैं जिसे हम नष्ट करने क़ी इच्छा रखते हैं | 

मित्रों कई बार भ्रष्टाचार के इस तंत्र को ध्वस्त करने के प्रयास अनेक देश भक्तों ने किये हैं लेकिन हमारा मूक दर्शक बन कर उन्हें ताकते रहना अपने आप उनके प्रयासों को क्षीण करता गया है जिन राष्ट्र भक्तों को देश को सर माथे में बैठना चाहिए था वो राजनैतिक षड्यंत्रों के भंवर में फंसकर शहीद हो जाते हैं और सच कहूँ तो इसके लिए वो स्वार्थी भ्रष्ट नेता ज़िम्मेदार नहीं हैं, ज़िम्मेदार हैं आप , मैं और हम सब लोग जिन्होंने हमेशा मूक दर्शक बन कर राष्ट्र हित के इन प्रयासों को कमज़ोर किया है | हम जब कभी परेशान होते हैं बढ़ती हुई  मंहगाई से हर दिन होते घोटालों से हम सिर्फ अपने ही द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों को कोसने क़ी सिवा कुछ नहीं करते | हमे मतदान के लिए जाना दुश्कर लगने लगता है और फिर जाली वोटों ,सच्चे नोटों  और हमारे इस प्रसुप्त राष्ट्र वादिता से वही लोग संसद में पहुँचते हैं जिन्हें हम वहां नहीं देखना चाहते | हम कल भी चुप थे जब अंग्रेजों ने बाहर से आकर हमें गुलाम बना लिया था और हम आज भी चुप हैं | उस वक़्त भी हम उस मसीहा को ढूंढते थे जो हमें पराधीनता क़ी बेड़ियों से मुक्ति दिलाये और हम आज भी यही कर रहें हैं किन्तु पिछली बार जब हमें वो मसीहा मिले सारा हिंदुस्तान उसके साथ हो चला था फिर चाहे वो मसीहा बापू रहें हो , सुभाष चन्द्र बोस रहे हों या वो रहे हों भगत सिंह किन्तु जब इस बार हमें जोड़ने का ज़िम्मा कुछ राष्ट्र भक्तों ने उठाया है तो हम उनका साथ देने से बेहतर घर में बैठना पसंद करतें हैं | उन प्रखर राष्ट्र भक्तों को आपका सहयोग अपेक्षित है जिस से आप , मैं हम सब और हमारी आने वाली नस्लें उस  गौरवशाली भारत को देख सकें जिसकी कल्पना हम रोज़ करतें हैं | 

                    आइये हम राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को पहचाने और जुड़ें राष्ट्र प्रेम क़ी उस अविरल धारा में जिसे देश "इण्डिया अगेंस्ट करप्शन" के रूप में जान रहा है | जाते जाते आपको दुष्यंत
 कुमार जी क़ी वो विलक्षण पंक्तियाँ समर्पित करना चाहता हूँ जो सम सामायिक है .......
                             " हो चली है पीर पर्वत सी पिघली चाहिए , अब हिमालय से भी इक गंगा निकालनी चाहिए
                                       तेरे सीने में नहीं तो मेरे सीने में सही,   तेरे सीने में नहीं तो मेरे सीने में सही, 
                                                  हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए 
                                                  सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
                                                            मेरी कोशिश है कि 
                                                         ये तस्वीर बदलनी चाहिए "

हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए

  "भ्रष्टाचार क़ी भेंट चढ़े १५५५ हज़ार करोड़"

भ्रष्टाचार के काले पन्नों में एक और अध्याय जुड़ गया जब पुणे स्थित एक अत्यंत ही ज़िम्मेदार और महत्वपूर्ण संस्था "इण्डिया फोरेंसिक" ने ये खुलासा किया क़ी बीते दशक में १५५५ हज़ार करोड़ रूपए भ्रष्टाचार क़ी भेंट चढ़ गए हैं और भी ज्यादा परेशान करने वाला तथ्य ये क़ी इसमें से ज़्यादातर कमाई विदेश भेजी जा चुकी है | अपने आप में एक अनूठी रिपोर्ट "अस्सेस्तेर्निग साइज़ ऑफ़ करप्शन इन इण्डिया विथ रेस्पेक्ट तो मनी लौन्डरिंग" में बताया क़ी साल २००९ में प्रति व्यक्ति औसतन २००० रूपए क़ी घूस दी गई जो क़ी पिछले दस सालों में किसी नागरिक द्वारा इस मद में दी गई रकम का २६० गुना अधिक है | रिपोर्ट के मुताबिक बीते दशक में मनी लौन्डरिंग के तहत करीब १८८६ हज़ार करोड़ रूपए भारत से भेजे गए |

                      ऐसे कितने ही अध्याय भ्रष्टाचार के इस ग्रन्थ में अनवरत ही जुड़ते चले जायेंगे जब तक हम सभी स्वयं से इसका प्रतिकार नहीं करते| अपने कार्यों क़ी सुगमता को ध्यान में ना रख कर राष्ट्र हेतु कुछ प्रक्रियाओं कपालन में विश्वास नहीं रखते फिर वो चाहे बिना आरक्षण के रेल में यात्रा करना हो या फिर लाइसेंस बनाने के लिए बिना प्रक्रियाओं में बंधे लाइसेंस पाने का लालच | हम सभी अगर अंतिम शदों में कार्यों के निष्पादन से बचें तो अपने आप हम इन प्रक्रियाओं से हम बच सकते हैं | षडिक सहजता एवं सरलता कई बार हमें अनजाने में ही इस भ्रष्ट तंत्र का एक हिस्सा बना देती है. कहीं ना कहीं हम उसी तंत्र को मज़बूत करते जाते हैं जिसे हम नष्ट करने क़ी इच्छा रखते हैं | 

मित्रों कई बार भ्रष्टाचार के इस तंत्र को ध्वस्त करने के प्रयास अनेक देश भक्तों ने किये हैं लेकिन हमारा मूक दर्शक बन कर उन्हें ताकते रहना अपने आप उनके प्रयासों को क्षीण करता गया है जिन राष्ट्र भक्तों को देश को सर माथे में बैठना चाहिए था वो राजनैतिक षड्यंत्रों के भंवर में फंसकर शहीद हो जाते हैं और सच कहूँ तो इसके लिए वो स्वार्थी भ्रष्ट नेता ज़िम्मेदार नहीं हैं, ज़िम्मेदार हैं आप , मैं और हम सब लोग जिन्होंने हमेशा मूक दर्शक बन कर राष्ट्र हित के इन प्रयासों को कमज़ोर किया है | हम जब कभी परेशान होते हैं बढ़ती हुई  मंहगाई से हर दिन होते घोटालों से हम सिर्फ अपने ही द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों को कोसने क़ी सिवा कुछ नहीं करते | हमे मतदान के लिए जाना दुश्कर लगने लगता है और फिर जाली वोटों ,सच्चे नोटों  और हमारे इस प्रसुप्त राष्ट्र वादिता से वही लोग संसद में पहुँचते हैं जिन्हें हम वहां नहीं देखना चाहते | हम कल भी चुप थे जब अंग्रेजों ने बाहर से आकर हमें गुलाम बना लिया था और हम आज भी चुप हैं | उस वक़्त भी हम उस मसीहा को ढूंढते थे जो हमें पराधीनता क़ी बेड़ियों से मुक्ति दिलाये और हम आज भी यही कर रहें हैं किन्तु पिछली बार जब हमें वो मसीहा मिले सारा हिंदुस्तान उसके साथ हो चला था फिर चाहे वो मसीहा बापू रहें हो , सुभाष चन्द्र बोस रहे हों या वो रहे हों भगत सिंह किन्तु जब इस बार हमें जोड़ने का ज़िम्मा कुछ राष्ट्र भक्तों ने उठाया है तो हम उनका साथ देने से बेहतर घर में बैठना पसंद करतें हैं | उन प्रखर राष्ट्र भक्तों को आपका सहयोग अपेक्षित है जिस से आप , मैं हम सब और हमारी आने वाली नस्लें उस  गौरवशाली भारत को देख सकें जिसकी कल्पना हम रोज़ करतें हैं | 

                    आइये हम राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को पहचाने और जुड़ें राष्ट्र प्रेम क़ी उस अविरल धारा में जिसे देश "इण्डिया अगेंस्ट करप्शन" के रूप में जान रहा है | जाते जाते आपको दुष्यंत
 कुमार जी क़ी वो विलक्षण पंक्तियाँ समर्पित करना चाहता हूँ जो सम सामायिक है .......
                             " हो चली है पीर पर्वत सी पिघली चाहिए , अब हिमालय से भी इक गंगा निकालनी चाहिए
                                       तेरे सीने में नहीं तो मेरे सीने में सही,   तेरे सीने में नहीं तो मेरे सीने में सही, 
                                                  हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए 
                                                  सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
                                                            मेरी कोशिश है कि 
                                                         ये तस्वीर बदलनी चाहिए "

Friday, July 15, 2011

कौन से लोग हैं ये ?

वो सोचते हैं क़ी शायद ये पागल हैं, कभी कभी उन्हें लगता है क़ी इसमें कोई ना कोई छुपा फायदा तो इनका होगा ही ,फिर जब उनकी जिज्ञासाओं का कोई समाधान नहीं हो पता तो फिर अपना ध्यान दूसरी जगह लगा कर वो बचने लगते हैं उन जवाबों से जो उन्हें परेशान कर सकते हैं| पागलपन, जज्बा , राष्ट्र भक्ति चाहे किसी भी नाम से पुकार लो दिखने लगी है ये अब संस्कारधानी जबलपुर क़ी सड़कों पर | जिस संस्कारधानी को सारा राष्ट्र अपने राष्ट्र व्यापी आंदोलनों स्वाधीनता संग्राम के महत्वपूर्ण योगदान के लिए जनता था उसी संस्कारधानी क़ी छटा कुछ ख़राब कर दी है यहाँ क़ी भ्रष्ट होती राजनीती ने| हर दिन होते चक्का जाम , पुलिस से होती मुठभेड़, खून, दंगे जैसे हिस्सा बन गए हैं हमारे दैनिक जीवन का 

                                  इसी बीच एक आशा क़ी किरण सी कोंधी जब कुछ देश भक्तों ने ये संकल्प लिया क़ी अब बस बहुत हुआ हम कब तक यूँ ही इस निरंकुश शासन को कोस कर जीते रहेंगे, हम कब तक अपनी सुरक्षा , अपने हितों अपने वतन के लिए ज़िम्मेदार लोगों को हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने देते रहेंगे फिर कोई अजमल कसब का इंतज़ार करेंगे हमारी संप्रभुता में  प्रश् चिन्ह लगाने के लिए ? हम यूँ ही शांत राह कर सहते रहेंगे कुछ राजा, कलमाड़ी , कनिमोझी, जैसे  नेताओं को जिन्हें राष्ट्र हित में कुछ भी करने से बेहतर अपना घर भरना लगता है?

हम तब भी शांत थे जब हम पे अग्रेजों ने शासन करने का इरादा किया था और हम आज भी शांत हैं; हम कल तब भी शांत थे जब हमारा देश दासता क़ी बेड़ियों में बांध रहा था और हम आज भी शांत हैं...दरअसल हमारी चुप्पी ही हमारी दुश्मन है| अब आप सोचे हमे किस का डर है आप का जीवन आप[ को ललकार रहा है धिक्कार रहा है इस स्वार्थ परक भावनाओं का नाश करने के लिए  | उठिए जागिये और समझने क़ी कोशिश कीजिये अपने राष्ट्र क़ी पुकार को , आपकी मात्र भूमि आपका आह्वान कर रही है ...

मैं जिन लोगों के बारे में बात कर रहा हूँ उन्होंने इस पुकार को ना केवल सुना है जबकि उसे गले से भी लगा लिया है दिन पे दिन कम होती रस्त्र्भक्तों क़ी संख्या को बढ़ने के लिए वो स्वप्रेरित हैं , देश के उत्थान के लिए भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए बीड़ा उठ लिया है चंद राष्ट्र भक्तों ने जबलपुर में |
 
                वो नेता नहीं हैं और ना ही कभी वो होना चाहते हैं वो आम जनता हैं जबलपुर क़ी जिन ने अपने रास्त्र के लिए खुद कुछ करने का संकल्प लिया है | आप उनके कार्यों को पेपर में बहुत ही कम पढेंगे क्यूंकि वो इसकी इच्छा ही नहीं रखते उनका समर्पण तो बस राष्ट्र के प्रति है वो दीवाने सुबह ५:१५ मिनिट पर उठ कर गली गली जाकर अलख जागते हैं राष्ट्र प्रेम क़ी शाम को वो लोगों तक इस जन आन्दोलन को पहुँचाने के लिए घर घर जाते है बस इस विश्वास के साथ क़ी कुछ हमारे जैसे लोग तो और होंगे इस महानगर में ; कभी मायूसी तो कभी कामयाबी पर ये लोग रुकते नहीं हैं ये थकते नहीं हैं बसे निःस्वार्थ रूप से लगे रहते हैं अपने राष्ट्र भक्ति के इस ज्वर को घर घर तक पहुँचाने में | 

             रुकिए रुकिए मुझे साफ़ करने दीजिये क़ी ये सभी लोग खाली और फालतू नहीं हैं ये आईना हमारे समाज का , इन में से कुछ सरकारी सेवा में हैं , कुछ वकालत में, कुछ प्राध्याप हैं, कुछ छात्र है तो कुछ उद्योगपति भी हैं , वे युवा हैं , वे प्रोढ़ हैं वे वो संकल्पित युवा हैं जिन्होंने अपनी राष्ट्र के प्रति ज़िम्मेदारी को  अपने दैनिक जीवक के कार्यों , अपनी दैनिक परेशानियों और अपने हालातों से कहीं ऊंचा स्थान दिया है|

दोस्तों आप को नहीं लगता क़ी अब आपको भी ऐसे लोगों के साथ होना चाहिए , क्या आपको नहीं लगता क़ी देश के प्रति अपना क़र्ज़ चुकाने का एक मौका आपको मिल रहा है और आप को इसे चुका देना चाहिए अगर आपके मन भी वही राष्ट्र भक्ति आपके रक्त में उबल रही है तो आइये और जुड़ जाइये राष्ट्र भक्तों के इस समूह में जिसे वे "इंडिया अगेंस्ट करप्शन" कहते हैं .........

अगर अभी नहीं तो कभी नहीं ............................... 

Wednesday, July 13, 2011

"जय हिंद"

आज अपने जीवन के उद्देश्यों  क़ी जीवन के मूल्यों और सिद्धांतो क़ी ताकत को देख कर अति प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ. जिस दिन से भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन का शंखनाद किया है सम्पूर्ण चिंतन निज परक ना होकर राष्ट्र वादी होने लगा है| पिछले कुछ दिन कुछ छोटी छोटी बातों के कारन बड़े उहा पोह के दिन थे किन्तु सिद्धांतों पर अडिकता ने आज अपने जीवन के उद्देशों के लिए संकल्पित और समर्पित होने के लिए प्रेरित किया. आज इंडिया अगेंस्ट कर्र्प्शन क़ी टोली ने अपनी कल क़ी महत्वपूर्ण बैठक में लिए एक सुझाव को अम्लीय जमा पहनाने का प्रयत्न किया जब आज सारी टोली निकल पड़ी घर घर में व्यक्तिगत रूप से मिल कर राष्ट्र प्रेम क़ी उसी भावना का संचार करने जिसकी आज हमारे राष्ट्र को ज़रुरत है. हर घर में पहले तो दरवाज़ों के अन्दर से झांकते डरे चहरे दीखते जो हम में या तो किसी नेता क़ी तस्वीर दुन्ढ़ते या फिर  किसी चंदा मांगने वाले क़ी ...लेकिन ऐसा कहते हैं ना क़ी अगर मन में पवित्रता और उद्देश्यों में दृढ़ता हो तो फिर आपको किसी तार्किक शक्ति क़ी ज़रूरत किसी को कुछ समझाने में नहीं लगती बस वैसे ही लोगों ने जैसे ही हमारे उद्देश्यों को सुना वो निकल आये घरों के बाहर बेख़ौफ़ होकर खुशी खुशी इस आन्दोलन में अपना योगदान देने.मनसा वाचा कर्मडा सारे ईमानदार राष्ट्र भक्तों को एक होते देर ना लगी और घर घर जाने का अथक प्रयास मिलने वाले सकारातम अनुभवों के आगे नत मस्तक हो गया| कही युवाओं क़ी टोली एक होकर हमारे समर्थन में भारत माता के जयघोष में जुट गयी कहीं अपने परिवार के लिए भोजन तैयार कर रहीं महिलाएं खाने क़ी चिंता छोड़ कर जुट गयीं अपना योगदान देने के विषय में जानकारी हासिल करने में| हम सभी भारत माँ के सच्चे सपूतों को तलाश करने में जुटे हैं और इस प्रकार का उत्साह वर्द्धक नतीजा हमें बहुत जल्दी ही अपने जैसे जुनूनी लोगों क़ी टोली इक्कठी कर देने में सहायक होगा | सच बहुत खुशी हुई अगर आप भी अपने जीवक के कुछ यादगार लम्हों को पाना चाहतें हैं तो आइये और जुड़ जाइये हमारे इस प्रयास से कल सुबह ५:१५ मिनिट पर कछपुरा ब्रिज के नीचे हनुमान मंदिर जबलपुर में.......जोर से चिल्लाने का मन कह रहा है 
"जय हिंद"

Friday, July 8, 2011

‎"समय इन्सान क़ी सही पहचान बता देता है ....ये तल्ख़ टिप्पड़ी मेरे उन तमाम दोस्तों को मेरी तरफ से समर्पित है जिन क़ी सक्रियता फेसबुक पर तो दिखती है और वह वो राष्ट्र के लिए मरने मारने क़ी कसमें खाते भी दिखाई देते हैं किन्तु जब राष्ट्र हित में कुछ करने का समय आ जाता है तो वह घर में सोना, डेल्ही बेल्ली देखना , बिना मतलब क़ी फोटो टेग करना , बिना मतलब क़ी सक्रियता दिखाने में उनकी राष्ट्रीयता व्यस्त हो जाती है . शर्म आणि कहिये उन सभी लोगों को जो घर बैठ कर इस कपोल कल्पना में लगे हैं क़ी एक दिन वह सुबह तो आएगी......आप ने राजनेताओं में विश्वास कर लम्बी चादर ओढ़ ली उस चादर को बुरी तरह फद्द्कर आपके विश्वास का जो हाल उन्होंने किया वह भी आपको शिरोधार्य है,अब जब सारी आम जनता मिलकर देश के लिए कुछ करना छाती है तो आपकी प्राथमिकता दोपहर को सोना हो जात है , घर के सारे काम तो इतने सालो से आप करते आये हैं पहली बार तो देश ने आपको पुकारा और आप ऐसे मशगूल हुए क़ी वो चिल्लाता रहा पर आप टस से मस नहीं हुए ....क्या आपका ज़मीर आप को इसकी इज़ाज़त देता है ? अगर नहीं तो कृपया यह जन लीजिये क़ी कल सुबह से राष्ट्र भक्ति क़ी अलख जगाने क़ी ज़िम्मेदारी हम सब ने मिल कर ली है और हम सभी अपनी थकन अपने घर के काम और बारिश भूल कर सुबह ५:१५ मिनिट पर एकत्र होने ज रहे हैं अगर अभी भी आप चाहें तो कृपया आकर राष्ट्र प्रेम क़ी इस विचारधारा में शामिल हो सकतें हैं वरना मेरा आपसे एक विनम्र निवेदन यह है कि आप अपनी बेतुकी बैटन में तब तक मशगूल रहें जब तक आपके घर में आग ना लग जाये वैसे तब भी आप हमें याद करना हम ज़रूर आयेंगे अपना फ़र्ज़ पूरा करने ...अगर आपको मेरी बात का बुरा लगा हो तो धन्यवाद् क्यूंकि मेरा यही उद्देश था मीठी मीठी बातों से राजनेता बेह्लातें हैं राष्ट्र भक्त नहीं .............

Come on Jabalpur Dikha Do.........

प्रिय जबलपुर वासियों ये सन्देश आपको आह्वान करता है राष्ट्र प्रेम क़ी एक विचारधारा से जुड़ने हेतु . ये सन्देश है जिस प्रतिकूल परिस्थितियों में देश जा रहा है जहाँ समाज में नैतिकता राष्ट्र प्रेम और ईमानदारी जैसे शब्द हास्य का पात्र बन चुके हैं उस प्रतिकूल समय में एक जुट होकर देश के प्रति अपनी निष्ठा अपनी भक्ति अपनी सच्ची भावना को प्रदर्शित करने का.प्रिय दोस्तों मैं आज आपको आह्वान करता हु राष्ट्र भक्ति क़ी उसी भावना से जुड़ने का जिसका शंखनाद श्री अन्ना हजारे जी ने किया है .बहुत समय से एक लम्बी ख़ामोशी क़ी चादर ओढ़ रखी है जबलपुर ने यदा कदा जो शोर सुने देता है वो राजनातिक गलियारों से आता है . जिस संस्कारधानी का इतना गौरव शाली इतिहास रहा है विशुद्ध राष्ट्र भक्ति से जुड़े आन्दोलन में बढ़ चढ़कर भाग लेने का, अगर आप परेशां हो चुके हैं बेतहाशा बढती महंगाई से , अगर आप थकने लगे है बिना बात क़ी जबर वसूली से,अगर सरकारी दफ्तरों के बाबुओ के चाय पान के साधिकार आग्रह से, अगर आप दुखी होते है राष्ट्र के हजारो करोड़ रुपयों के भ्रष्ट नेताओ के भेंट चढ़ने से, अगर आप का खून खोलता है इस अनैतिक कदाचरण से , और आप का खून आपको इस अन्याय को और सहन करने से रोकता है आपके संस्कार आपको स्वयं को राष्ट्र के लिए कुछ करने को प्रेरित करते हैं और आपकी राष्ट्र भक्ति आपके स्वयं के प्रेम परिवार के प्रेम से बढ़कर है तो आइये कल सुबह ५:१५ मिनिट पर एम्.पी.ई.बी. बेर्रिएर के पास  और जुड़ जाइये उन जुनूनी राष्ट्रभक्तों के साथ जिनने दुनिया को बदलने का बीड़ा उठा लिया है..हम सभी आप का इंतज़ार करेंगे कृपया आइयेगा ज़रूर 

Zindagi....

ज़िन्दगी में कभी कभी ऐसी घटनाएँ होती हैं जो आप के अंतर्मन को हिला कर रख देती है , ऐसी ही एक घटना से कल मेरा साक्षात्कार हुआ जब एक मुस्लिम महिला मुझ से अपने बेटे के इंजीनियरिंग के प्रवेश के लिए मिली . उनके घर में ४ सदस्य हैं माँ के अलावा जो पढाई कर रहें हैं. घर के सभी खर्चों के लिए आमदनी का जरिया माँ का गाँव - गाँव जाकर चूड़ियाँ बेचना बेटा साइकिल पकड़ कर आगे चलता है, माँ साइकिल के पीछे चूड़ियों का डिब्बा पकड़ कर कई किलोमीटर घुमने के बाद पूरे महीने पसीना बहाने के बाद वो बमुश्किल १५०० रूपए आजीविका कमाने के बाद भरण पोषण एक बड़ी समस्या है . वहीँ वो ईमानदार बच्चा अपनी माँ की मेहनत का प्रतिफल अपने १२ वी कक्षा में ८९% अंक और पी ई टी में ७९ अंक थे . पढने की अधम्य इच्छा माँ की मज़बूरी के आगे विवश थी, और शासन की एक बहुत अच्छी योजना उसके सपनो को साकार करने की ताकत दे रहे थे बस एक छोटी सी कागज़ी ज़रूरत के पूरा होने के देर थी वो भी बहुत छोटी सी ज़रूरत जाती प्रमाण पत्र बनाने की लेकिन आप इसे विधि का विधान कहेंगे या हमारे भाग्य विधाता बन चुके भ्रष्ट तंत्र की क्रूर परिणिति की जो अभागी माँ अपने पूरे परिवार का भरण पोषण हेतु दिन रात मेहनत करने के बाद पूरे साल में १८०००/- कमाती थी उस लाचार महिला से कार्य कराने की प्रेरणा राशि (जिसे हम आम जीवन में घूस के रूप में जानते हैं) के रूप में १००००/- रुपयों की मांग की और वो ममता का आँचल फैलाई माँ विवशता के आंसुओं को दिल में सहेजे कर अपने कई सालों की मेहनत जो उसने सहेज के रखी थी किसी बड़े कार्य के निष्पादन के लिए वो समर्पित कर आई हमारे शासकीय कार्यालय के भाग्यविधाता परमपूज्य शासकीय अधिकारीयों को
ये सब सुन कर मेरी आँखों में आंसू आ रहे थे पर उसके पहले मैं नमन करना चाहता था उन पाषाण ह्रदय महानुभावों का जिन के लिए ईमानदारी तो दूर की बात है तनिक संवेदना भी मानवीय मूल्यों के प्रति भी नहीं बची है.अगर कुछ इन के जीवन में अपरिहार्य है तो वो चढ़ावा जिसका मूल्य मानवीय मूल्यों से कहीं अधिक है..विडम्बना की जिस कार्यालय का उल्लेख मैं कर रहा हूँ वो इस देश में संस्कारधानी के नाम से विख्यात जबलपुर के जिलाधीश कार्यालय का ........क्या किसी को शर्मनाक से भी ज्यादा उचित शब्द इन के लिए समझ में आता है ???