Friday, July 15, 2011

कौन से लोग हैं ये ?

वो सोचते हैं क़ी शायद ये पागल हैं, कभी कभी उन्हें लगता है क़ी इसमें कोई ना कोई छुपा फायदा तो इनका होगा ही ,फिर जब उनकी जिज्ञासाओं का कोई समाधान नहीं हो पता तो फिर अपना ध्यान दूसरी जगह लगा कर वो बचने लगते हैं उन जवाबों से जो उन्हें परेशान कर सकते हैं| पागलपन, जज्बा , राष्ट्र भक्ति चाहे किसी भी नाम से पुकार लो दिखने लगी है ये अब संस्कारधानी जबलपुर क़ी सड़कों पर | जिस संस्कारधानी को सारा राष्ट्र अपने राष्ट्र व्यापी आंदोलनों स्वाधीनता संग्राम के महत्वपूर्ण योगदान के लिए जनता था उसी संस्कारधानी क़ी छटा कुछ ख़राब कर दी है यहाँ क़ी भ्रष्ट होती राजनीती ने| हर दिन होते चक्का जाम , पुलिस से होती मुठभेड़, खून, दंगे जैसे हिस्सा बन गए हैं हमारे दैनिक जीवन का 

                                  इसी बीच एक आशा क़ी किरण सी कोंधी जब कुछ देश भक्तों ने ये संकल्प लिया क़ी अब बस बहुत हुआ हम कब तक यूँ ही इस निरंकुश शासन को कोस कर जीते रहेंगे, हम कब तक अपनी सुरक्षा , अपने हितों अपने वतन के लिए ज़िम्मेदार लोगों को हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने देते रहेंगे फिर कोई अजमल कसब का इंतज़ार करेंगे हमारी संप्रभुता में  प्रश् चिन्ह लगाने के लिए ? हम यूँ ही शांत राह कर सहते रहेंगे कुछ राजा, कलमाड़ी , कनिमोझी, जैसे  नेताओं को जिन्हें राष्ट्र हित में कुछ भी करने से बेहतर अपना घर भरना लगता है?

हम तब भी शांत थे जब हम पे अग्रेजों ने शासन करने का इरादा किया था और हम आज भी शांत हैं; हम कल तब भी शांत थे जब हमारा देश दासता क़ी बेड़ियों में बांध रहा था और हम आज भी शांत हैं...दरअसल हमारी चुप्पी ही हमारी दुश्मन है| अब आप सोचे हमे किस का डर है आप का जीवन आप[ को ललकार रहा है धिक्कार रहा है इस स्वार्थ परक भावनाओं का नाश करने के लिए  | उठिए जागिये और समझने क़ी कोशिश कीजिये अपने राष्ट्र क़ी पुकार को , आपकी मात्र भूमि आपका आह्वान कर रही है ...

मैं जिन लोगों के बारे में बात कर रहा हूँ उन्होंने इस पुकार को ना केवल सुना है जबकि उसे गले से भी लगा लिया है दिन पे दिन कम होती रस्त्र्भक्तों क़ी संख्या को बढ़ने के लिए वो स्वप्रेरित हैं , देश के उत्थान के लिए भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए बीड़ा उठ लिया है चंद राष्ट्र भक्तों ने जबलपुर में |
 
                वो नेता नहीं हैं और ना ही कभी वो होना चाहते हैं वो आम जनता हैं जबलपुर क़ी जिन ने अपने रास्त्र के लिए खुद कुछ करने का संकल्प लिया है | आप उनके कार्यों को पेपर में बहुत ही कम पढेंगे क्यूंकि वो इसकी इच्छा ही नहीं रखते उनका समर्पण तो बस राष्ट्र के प्रति है वो दीवाने सुबह ५:१५ मिनिट पर उठ कर गली गली जाकर अलख जागते हैं राष्ट्र प्रेम क़ी शाम को वो लोगों तक इस जन आन्दोलन को पहुँचाने के लिए घर घर जाते है बस इस विश्वास के साथ क़ी कुछ हमारे जैसे लोग तो और होंगे इस महानगर में ; कभी मायूसी तो कभी कामयाबी पर ये लोग रुकते नहीं हैं ये थकते नहीं हैं बसे निःस्वार्थ रूप से लगे रहते हैं अपने राष्ट्र भक्ति के इस ज्वर को घर घर तक पहुँचाने में | 

             रुकिए रुकिए मुझे साफ़ करने दीजिये क़ी ये सभी लोग खाली और फालतू नहीं हैं ये आईना हमारे समाज का , इन में से कुछ सरकारी सेवा में हैं , कुछ वकालत में, कुछ प्राध्याप हैं, कुछ छात्र है तो कुछ उद्योगपति भी हैं , वे युवा हैं , वे प्रोढ़ हैं वे वो संकल्पित युवा हैं जिन्होंने अपनी राष्ट्र के प्रति ज़िम्मेदारी को  अपने दैनिक जीवक के कार्यों , अपनी दैनिक परेशानियों और अपने हालातों से कहीं ऊंचा स्थान दिया है|

दोस्तों आप को नहीं लगता क़ी अब आपको भी ऐसे लोगों के साथ होना चाहिए , क्या आपको नहीं लगता क़ी देश के प्रति अपना क़र्ज़ चुकाने का एक मौका आपको मिल रहा है और आप को इसे चुका देना चाहिए अगर आपके मन भी वही राष्ट्र भक्ति आपके रक्त में उबल रही है तो आइये और जुड़ जाइये राष्ट्र भक्तों के इस समूह में जिसे वे "इंडिया अगेंस्ट करप्शन" कहते हैं .........

अगर अभी नहीं तो कभी नहीं ............................... 

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